झाबुआ मे मोहना राज में जिला प्रशासन की लापरवाही झाबुआ मुख्यालय पर ही बिक रहा अवैध मांस, कई बार हिंदू संगठन दे चुके हैं जनसुनवाई में आवेदन।

लो भैया फिर आ गया लेकर फिर एक नई खबर के साथ। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चर्चा चौराहे पर चल रही है, कुछ लोग आपस में चर्चा कर रहे थे,की झाबुआ के वार्ड नंबर 7 में जनता परेशान है, बोलकर भी बोल नहीं सकती, भाजपा के राज में धड़ल्ले से बिक रहा, अवैध मांस झाबुआ कलेक्टर कार्यालय, एवं 𝐒𝐏 कार्यालय से महज कुछ ही दूरी पर झाबुआ नगर पालिका है। और झाबुआ नगर पालिका से सटा है पुरा वार्ड नंबर 7, जहां धड़ल्ले से बिना लाइसेंसियो के द्वारा मांस बेचा जा रहा है। कुछ लोगों का यह भी कहना है। यहां बड़े और छोटे जानवरों को काटकर झाबुआ से गुजरात भेजा जाता है। आपस में बात कर रहे लोगों में से एक व्यक्ति बोला हां भाई यह बात तो सही है गुजरात में बीफ बंद है। जब इस अवैध मांस तस्करी का विरोध किया जाता है तो, प्रशासनिक लोग दूसरे दिन आकर फॉर्मेलिटी निभा कर चले जाते हैं।

         अब सवाल यह पैदा होता की क्या पुलिस एवं प्रशासन की यह जिम्मेदारी नहीं की शासन प्रशासन ने जो निर्देश दिए हैं,उसको फॉलो कराये। क्या पुलिस एवं प्रशासन को कार्यवाही करने के लिए कोई आवेदन की आवश्यकता पड़ती, क्या प्रशाशनिक लोग स्वतः ही इस मामले को संज्ञान में नहीं ले सकते। क्या ऑर्डर फॉलो करवाना उनका कर्तव्य नहीं। इतने में पीछे से एक व्यक्ति भीड़ मे से बोल, भाई मस्जिद वाले और आसपास के लोग भी परेशान है गंदगी और बदबू का अंबार लगा रहता है। मोहल्ले में दबंगों के कारण कोई बोलता नहीं। और दबंगों के द्वारा लक्ष्मी यन्त्र का प्रयोग कर मामला सुलझा लिया जाता है। और साथ में आवाज उठाने वाले को धमकी भी दी जाती है, कि "तेरे को तो मैं देख लूंगा"।
                इतने में पीछे से एक आवाज आई सीधा उदहारण यही देख लो" झाबुआ कलेक्टर को आए 1 वर्ष से अधिक हो चुका है, पर आज तक कोई व्यवस्था नहीं बन पाई ",सब हाईलाइट होना चाहते हैं पर काम कोई नहीं करना चाहता।

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