नशा खोरी और जुआ सट्टे पर कलेक्टर और SP की नहीं लगाम....?

जावेद खान। ✍️।झाबुआ

झाबुआ में जुए व नशाखोरी की लत तेजी से अपने पैर पसार रही है। इसकी गिरफ्त में युवा पीढ़ी भी आ रही है। इन सामाजिक कुरीतियों की वजह से अधिकाश परिवार जहां आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं तो वहीं काफी युवाओं के कदम अपराध की दुनिया की ओर भी बढ़ रहे हैं। इससे युवाओं का भविष्य भी संकट में आ रहा है। दूसरी तरफ नशीले पदार्थो की बिक्री करने वाले और जुआ-सट्टा चलाने वालों की सांख्य बढ़ रही और उनकी चांदी हो रही है।

बता दें कि झाबुआ जिले के ज्यादातर बड़े गांवों के साथ कस्बों में भी जुआ-सट्टे का अवैध धधा चल रहा है। गांवों में सुबह से ही युवक विभिन्न जगहों पर जुआ खेलने लग जाते है। बडे़ गांवों में प्रतिदिन लाखों रुपये का जुआ खेला जाता है। जुए के साथ बच्चों व युवाओं में नशाखोरी की लत भी लग रही है। आलम यह है कि स्कूलों के सामने भी नशीले पदार्थ बेचने वाले खोखे जमे हुए हैं। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी चोरी छिपे यहां आकर नशा करते हैं।

स्कूली छात्र भी खेल रहे जुआ


जुआ खेलने में स्कूली विद्यार्थी भी पीछे नहीं है। स्कूलों पहुंचकर वहीं अपना बस्ता रखकर कई विद्यार्थी वहां से फरार हो जाते हैं और पहुंचते हैं इसके अड्डों पर। स्थिति इस कदर बिगड़ रही है कि बच्चे घर से किताब-कापियां खरीदने के लिए पैसे लाते हैं और उसे जुए में उड़ा देते हैं। बचपन में जुआ खेलने की बुरी लत पड़ने से उनके भविष्य भी खराब हो रहा है।


सरे आम बिक रहा है नशा


शराब, बीयर के साथ-साथ आजकल के युवा गांजे का भी सेवन कर रहे है। गांजे को सिगरेट में भरकर लंबे-लंबे कश लेते हुए बच्चों को देखा जा सकता है। गांजे से भरी सिगरेट के कुछ कश लगाने के बाद उन्हें होश नहीं रहता कि वे कहां हैं। 

बच्चों और युवाओ की नसो मे दौड़ता ड्रग्स का जहर 

बताने वाले बताते है की, ज़िले भर मे काली पोटली सस्ता नशा, आसानी से मील जाता, और तो और लोग यह भी बता रहे थे की बसों के माध्य्म से आने वाले पार्सल जो नबली बाइकर्स इधर से उधर भी करते है, और ठिकाने तक पहुंचा देते है, इन बाइकरो की घर की स्थिति, इतनी दयनीय और इनके पास महंगे मोबाइल और लाखो की बाइक स्वालिया निशान खड़े कर रही है..?

 तत्कालीन एसपी आगम जैन ने इन पर शिकंजा कसा और खुद डंडा उठाकर निकले थे, हजारों की संख्या में गांजे के पौधे बरामद किए थे,जगह जगह ड्रग माफियाओ पर शिकंजा कसा था। पर उनके जाने के बाद वही ढाक के तीन पाथ वही नशाखोरी और सट्टे बाजी आम हो गई। उसके बाद तो 265 करोड़ के लगभग में मेफ़ेड्रोन ड्रग का मामला भी उजागर हुवा, जिले का पुलिस महकमा सोया हुआ था, और बाहर की पुलिस आकर कार्रवाई कर गई थी।अब जिले को नए  कलेक्टर डा. योगेश भरसट एवं नवागत पुलिस अधीक्षक के रूप में पस्थ देवेंद्र पाटीदार से कार्यवाही की आस लगी है। उनके आगमन को लेकर आमजन में उम्मीदों का माहौल है कि कानून व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।

जर, जोरू और जमीन” सबसे बड़ी चुनौती

जिले में पारिवारिक और जमीन से जुड़े विवाद अक्सर गंभीर अपराधों का रूप ले लेते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में तनाव की स्थिति तब बनती है जब लोग नशे मे होते है। सारे फ़साद की जड नशा ही है।

थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल

थानों में कथित लेनदेन और ‘भंजगड़ी’ की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गरीब और आदिवासी वर्ग को समय पर न्याय नहीं मिल पाता।

जनता की अपेक्षाएं

नवागत एसपी से उम्मीद है कि वे पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता लाएंगे और शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करेंगे।

आदिवासी क्षेत्रों में न्याय की आसान पहुंच प्राथमिकता होगी।

जनसंवाद से मिलेगी दिशा

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि नए एसपी गांव-गांव जाकर सीधे संवाद स्थापित करें, तो वास्तविक समस्याएं सामने आएंगी और समाधान भी प्रभावी होगा।

निष्कर्ष

अब देखना यह होगा कि नवागत एसपी देवेंद्र पाटीदार जिले की चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं।

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