बस स्टैंड की 13 दुकानों पर बढ़ा विवाद, न्यायालय के निर्देशों के बाद भी नहीं खुली सील।जर्जर भवनों को लेकर नगर पालिका और व्यापारियों के बीच टकराव, व्यापारी संघ आंदोलन की तैयारी में....

झाबुआ। नगर पालिका के बस स्टैंड स्थित 13 दुकानों को लेकर पिछले दो सप्ताह से चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जर्जर घोषित किए गए भवनों को खाली कराने और सील करने की कार्रवाई के बाद अब मामला न्यायालय, प्रशासन और व्यापारी संगठनों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका द्वारा दुकानदारों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन नोटिस के बाद भी व्यापारियों की ओर से कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद नगर पालिका कर्मचारियों ने दुकानों को सील करने का प्रयास किया, हालांकि उस समय कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। बाद में शनिवार को संबंधित दुकानों को सील कर दिया गया।
दुकानों के सील होने के बाद प्रभावित व्यापारी न्यायालय की शरण में पहुंचे। न्यायालय ने नगर पालिका को निर्देश दिए कि भवनों का तकनीकी निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित भवन उपयोग योग्य हैं या जर्जर एवं खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं। साथ ही यह भी तय किया जाए कि उनमें व्यवसायिक गतिविधियां जारी रखना सुरक्षित है अथवा उन्हें ध्वस्त किया जाना आवश्यक है।
न्यायालय के निर्देशों के बाद दुकानदारों का प्रतिनिधिमंडल झाबुआ कलेक्टर से मिलने पहुंचा। इस दौरान नगर पालिका उपाध्यक्ष लखन सोलंकी भी उपस्थित रहे। कलेक्टर से मुलाकात के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए एसडीएम महेश मंडलोई ने बताया कि प्रशासन द्वारा एक पक्ष की बात सुन ली गई है, जबकि दूसरे पक्ष अर्थात नगर पालिका का पक्ष सुना जाना अभी शेष है।
सूत्रों के अनुसार न्यायालय के निर्देश प्राप्त होने के बाद नगर पालिका ने इंजीनियरों की एक टीम गठित कर भवनों का निरीक्षण कराया। बताया जा रहा है कि वर्ष 2023 की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर नई रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें भवनों को अत्यंत जर्जर और क्षतिग्रस्त बताया गया है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि भवनों के कई हिस्से टूट चुके हैं तथा दीवारों, छत और सरियों में गंभीर क्षति दिखाई दे रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जानकारों का कहना है कि पूर्व में उज्जैन पॉलिटेक्निक कॉलेज की तकनीकी टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में भी भवनों को अनुपयोगी और खतरनाक पाया गया था। इसी आधार पर नगर पालिका ने जनप्रतिनिधियों की सहमति से शनिवार शाम लगभग 8 बजे एक बैठक आयोजित कर भवनों को ध्वस्त करने की आवश्यकता पर चर्चा की।
बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भवन अत्यंत जर्जर हो चुके हैं और यदि भविष्य में कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी नगर पालिका पर आएगी। वहीं व्यापारियों का कहना था कि उनके पास न्यायालय का आदेश है और दुकानों की सील तत्काल खोली जानी चाहिए।
बताया जाता है कि इस दौरान नगर पालिका सीएमओ ने व्यापारियों से कहा कि यदि उनके पास न्यायालय का आदेश है तो नगर पालिका के पास भी न्यायालय के निर्देशानुसार तैयार की गई तकनीकी रिपोर्ट मौजूद है। यदि न्यायालय नवीन रिपोर्ट के बावजूद दुकानों को खोलने के निर्देश देता है तो नगर पालिका उसका पालन करेगी।
इधर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रभावित दुकानदारों ने सकल व्यापारी संघ के साथ मिलकर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार शीघ्र ही सकल व्यापारी संघ के बैनर तले झाबुआ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जा सकता है।
शहर के कई वरिष्ठ नागरिकों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि बस स्टैंड की ये दुकानें दशकों पुरानी हैं और वर्षों से इनमें कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि दुकानों के ऊपर स्थित परिसर भी अब उपयोग योग्य नहीं रह गया है और जनहित में भवनों का पुनर्निर्माण आवश्यक है।
नगर पालिका का दावा है कि दुकानदारों को आश्वस्त किया गया है कि पुनर्निर्माण के बाद यथास्थिति के अनुसार उन्हीं व्यापारियों को दुकानें आवंटित की जाएंगी। निर्माण लागत का वहन व्यापारियों को करना होगा तथा निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि व्यापारी संघ द्वारा प्रस्तावित ज्ञापन के बाद जिला प्रशासन क्या रुख अपनाता है। जनहित और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन जर्जर भवनों को लेकर क्या अंतिम निर्णय लेता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
— संवाददाता, झाबुआ

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