सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चार्चा चौराहे पर चल रही थी, कुछ लोग आपस में चर्चा कर रहे थे कि, किसने की समस्याओं को लेकर झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना का रुख सख्त है, आदिवासी अनचल झाबुआ जिले के लिए, मध्य प्रदेश शासन की योजनाओं को लेकर कलेक्टर नेहा मीना लगातार प्रयास कर रही है कि, झाबुआ जिले के किसानों को सरकार की सभी सुविधाओं का लाभ मिले और किसी भी योजना से किसान वंचित न हो, समय-समय पर मीटिंगो के माध्यम से जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देशित करना एवं दल गठित कर अव्यवस्था पर निर्गानी रखने के सतत निर्देश दिए जा रहे हैं, परंतु झाबुआ जिले में देखा जा रहा है कि, कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद भी, किसानों को उनकी मेहनत का मुआवजा मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा, जिले भर की तो छोड़ो झाबुआ मुख्यालय की ही बात करें तो, अभी वर्तमान में कपास का सीजन है, झाबुआ में हाट बाजार का चलन है, झाबुआ जिले के आदिवासी किसान, सतत वर्षों से अपने कपास और अनाज बेचने हाट बाजार के दिन ही आते हैं, झाबुआ में देखा गया है कि अनाज मंडी बंद पड़ी है और, अनाज माफिया गरीब किसानों से ओने-पौने दामों पर, बीना मंडी की नीलामी और बोली के मंडी के बाहर जगह-जगह दुकान लगाकर, तूलाटी में हेरा फेरी कर गरीब आदिवासियों से खरीद लेते हैं, उन्हें उनकी मेहनत का दाम पूरा नहीं मिल पाता है।
वहीँ व्यापारियों का यह भी कहना है कि हम हाट के दिन मंडी में किसानों का माल खरीदे पर, मंडी में हाट बाजार लगने के कारण जगह ही नहीं होती,की वहाँ पर नीलामी की जाए, यदि प्रशासन कोई व्यवस्था बना कर देती है तो हम वहां पर नीलामी के द्वारा माल लेने को तैयार है। बताया जा रहा है कि झाबुआ मंडी में लगभग 200 से अधिक व्यापारी के नाम दर्ज हैं पर मंडी में इक्का दुक्का व्यापारी ही नजर आते हैं।
जब इसकी शिकायत झाबुआ 𝐒𝐃𝐌 मंडी प्रशासक भास्कर घाचले से की गई, तो उनका कहना यह है कि रविवार के दिन कौन मंडी लगाता है, रविवार के दिन तो शासकीय छुट्टी होती है, चलिए मान लीजिए रविवार के दिन शासकीय अवकाश होता है, पर मंडी के अलावा जो बाहर प्रशासन के नियमों के विरुद्ध अनाज या कपास खरीदने हैं और गाड़ियों में भर भर कर ले जाते हैं उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं....?, लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर झाबुआ 𝐒𝐃𝐌 मंडी प्रशासक की लापरवाही है, और इसे सीधे तौर पर झाबुआ कलेक्टर को संज्ञान में लेना चाहिए, लोगों का यह भी कहना है कि, जब झाबुआ मुख्यालय पर यह स्थिति है तो जिले भर में क्या हाल होंगे।
यदि झाबुआ कलेक्टर नेहा पीना द्वारा एक दल गठित कर सूक्ष्मता से जांच की जाए तो अनाज माफियाओ का एक बड़ा रैकेट सामने आएगा, और उनका सहयोग कर रहे अधिकारीयों की भी पोल खुलेगी।
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